अठारहवा गुण रक्षक

।। अठारहवा गुण रक्षक ।।

एक दिन चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य अपने राज काज के कार्य कर रहे थे उसी वक्त दो सैनिक आते है महाराज हमने एक स्त्री को बंदी बनाया है ।
चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य - बंदी मगर क्यो ?
सैनिक - सम्राट वो स्त्री आत्महत्या का प्रयास कर रही थी । 
विक्रमादित्य- आत्महत्या वो भी हमारे राज्य में । कोई ऐसा सोचेगा यह हमने कल्पना भी नही की थी । यह सोचने वाले से ज्यादा हमारे लिए कलंक है ।
सैनिक - सम्राट वो दुखिया थी ।
सम्राट- उनके दुख का कारण क्या है , उन्हे हमारे सामने प्रस्तुत किया जाए ।
तभी वह स्त्री आती है ।
स्त्री- प्रणाम महाराज ।
सम्राट विक्रमादित्य- देवी आप क्यो आत्महत्या कर रही है हमारे राज्य के गौरव को कलंक क्यो लगा रही है । सैनिकों तुमने इन्हे कहां से पकडा ।
सैनिक - महाराज यह स्त्री क्षिप्रा जी में डूब कर मरने का प्रयास कर रही थी तभी हमने इन्हे बचा लिया । और इनसे पूछा ।
सम्राट विक्रमादित्य  - देवी आप निश्चिंत होकर कहे जो भी आपका अपराधी होगा हम उसे दंड देंगे ।
स्त्री - महाराज क्या आप स्वंय अपने आप को दंड देंगे । में आपके गुप्तचर वीरभद्र की पत्नी हूं ।
सेनापति - सम्राट वीरभद्र हमारा विश्वसनीय गुप्तचर है आपने एक वर्ष पहले पृथ्वी की सभी दिशाओं में अपने गुप्तचर भेजे थे प्रजा का हाल जानने के लिए सभी आ गए किंतु वो नही आया । 
सम्राट विक्रमादित्य - आपने उसे ढूंढने का प्रयास क्यो नही किया ।
सेनापति - सम्राट हमने एक बार दल भेजा था दक्षिण दिशा में जहां वो गया था किंतु दल को वो नही मिला तो हमने यह सोचा की कही कोई अनहोनी हो चुकी हो ।
सम्राट विक्रमादित्य - देवी हम समझ गए हमारी क्या भूल रही । सेनापति और आप सभी जिम्मेदार गण आगे से ऐसा ना हो ऐसे विषय में हमें तुरंत सुचित करे । विक्रमादित्य के लिए प्रजा का एक एक व्यक्ति महत्वपूर्ण है । देवी आप चिंता ना करे संपूर्ण पृथ्वी पर ऐसा कोई नही है जो चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के सैनिक को हाथ भी लगा पाए । आपके पति सुरक्षित है ।
सेनापति - देवी आप निश्चिंत रहे आप पृथ्वीपति चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के सामने खडी है महाराज आपके पति को कुछ नही होने देंगे ।
सम्राट विक्रमादित्य  - हम उस वीर को पृथ्वी के किसी भी कोने से ढूंढ लाएंगे । 

सम्राट विक्रमादित्य - आज राखी का दिन है हम यही सोचेंगे की हमारी बहन हमसे कुछ मांग रही है । आप महल में विश्राम करे हम आपके पति को जल्द लाएंगे । सैनिक देवी को विश्राम गृह में ले जाओ ।
सेनापति - महाराज हम कुछ सैनिक भेज देते है ।
सम्राट विक्रमादित्य - नही हम जाएंगे ।
सेनापति - एक मामूली सैनिक के लिए आप जा रहे है ।
सम्राट विक्रमादित्य - सेनापति हमारे लिए कोई मामूली नही है हम उसे लेकर आएंगे ।
सेनापति - महाराज वैसे तो आपके नाम से पूरा दक्षिण का मार्ग खल जाता है किंतु दक्षिण के द्वीपों में कुछ अनहोनी गठित हो रही है ।
सम्राट विक्रमादित्य  - आप चिंता ना करे किसी मनुष्य में इतना साहस नही जो आपके महाराज को रोक सके । हमारे जाने की व्यवस्था करो । 
सम्राट विक्रमादित्य दक्षिण में पहुंच जाते है किंतु वे आम प्रजा बनकर जाते है । वहां वे एक मंदिर पहुंचते है और मंदिर के पंडित जी से पूछते है पंडित जी यहां ठहरने की व्यवस्था कहां है ।
पंडित जी - श्रीमन् यहां ठहरने की व्यवस्था तो नही है किंतु जो भी बाहर का यात्री आता है वो मंदिर में ही विश्राम करता है । 
सम्राट विक्रमादित्य - पंडित जी यहां एक वर्ष पहले उज्जैनी से वीरभद्र नाम का युवक आया था क्या वो यही ठहरा था ।
पंडित जी - नाम तो मुझे नही याद किंतु हां उज्जैनी से एक आदमी आया था उसका यहां किसी से झगड़ा हुआ था वो घायल हो गया था किंतु वो बहुत बहादुर था ।
सम्राट विक्रमादित्य -  आप बता सकते है वो कहाँ होगा । 
पंडित जी - वो समुद्र किनारे ही 6 कौस की दूरी पर हो सकता है ।
सम्राट विक्रमादित्य - हम उसे ही खोजने आये है आपका धन्यवाद ।
सम्राट विक्रमादित्य निकलते है और वहां पहुँच कर देखते है वीरभद्र कुछ लोगों से घायल अवस्था में बात करते है ।
वीरभद्र - तुम सब एक हो जाओ तो हम जीत सकते है ।
ग्रामीण - नही वीरभद्र आपने देखा है उन लोगों ने द्वीप के उस ओर अपनी सेना बना दी है ।
वीरभद्र - यह चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य का राज्य है काश में उन तक यह संदेश पहुंचा पाता । 
तभी सम्राट विक्रमादित्य वीरभद्र की सभी बाते सुनकर आते है कहते है वीरभद्र हम आ गए ।
किसने हिम्मत की हमारे सैनिक पर हमला करने की । 
प्रजा - सम्राट वो बिल्कुल अजीब है उसी ने वीरभद्र (भैरव दत्त) पर हमला किया था ।

भैरव दत्त - सम्राट आपने मुझे दक्षिण के हाल जानने के लिए भेजा था में जब यहां पर पहुंचा तो मैंने देखा की प्रजा तो आपकी न्याय प्रियता के गुण गा रही है । किंतु तभी दो स्त्रियाँ चिलाती हुई आती है सम्राट में लड़ता भी हूं उनसे पर वे मुझे घायल कर देते है और उन दो स्त्रीयों को द्वीप पर ले जाते है । 
सम्राट - तुमने उन्हे बचाने का प्रयास किया हम यह जानते है । इसलिए अब हम जाएंगे । हमें यह बताओ वो द्वीप कितना दूर होगा । 
भैरव दत्त- हमें यह तो नही पता सम्राट किंतु हां वे नांव से आई थी । 
सम्राट - अगर वे नांव से आ सकती है तो हम तैर कर जा सकते है हम जाएंगे वहां और जब तक हम वहां से आ नही जाते तुम कही जाना मत हम साथ में उज्जैनी चलेंगे । जय मालवा ।
भैरव दत्त- जय मालवा सम्राट ।
दोनों स्त्रियाँ आपस में बात कर रही होती है हमारे घर वाले भी हमें मृत मानकर चल रहे होंगे ।
वही डाकूओं के पास दो व्यापारी आते है ।
डाकू - तुम लोग कहां से आए हो ।
व्यापारी- हम दूर हे आए है कच्छ से । हम दास दासियाँ खरीदने आए है । हमें दो सुन्दर कन्या चाहिए ।
डाकू- तुम सही जगह आए हो साथियों उन दोनो को लेकर आओ ।
तभी चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य उन स्त्रियों के पास पहुंच जाते है ।
स्त्रियाँ- कौन हो तुम और तुम यहां हे चले जाओ वरना यह लोग तुम्हे भी दास बनाकर किसी को बेच देंगे ।
सम्राट- हम चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य है और विक्रमादित्य किसी को पीडा में छोड़कर नही जाता । तुम दोनों कौन हो ।
स्त्रियाँ- महाराज आप । हम आन्ध्र महाराज चक्रपानी की राजकुमारीया है ।
सम्राट विक्रमादित्य डाकू के लोगों को मार कर आगे बढते है । और साथ में सभी को छुडवाते है । सम्राट विक्रमादित्य डाकू के पास पहुंचते है ।
डाकू - कौन हो तुम ।
सम्राट - हम विश्व विजेता चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य है और आज तुझे मार कर ही यहां से जाएंगे ।
सम्राट उसे मारकर वहां के सभी बंदियों को छुडवा देते है ।
चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य उज्जैनी पहुंच कर कहते है महाराज चक्रपानी यह रही आपकी दोनो बेटियां ।
राजा चक्रपानी- चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य जी में आपका यह ऋण जीवन भर नही चुका पाऊँगा । 
सम्राट- यह सब तो महाकाल की कृपा है ।
भैरव दत्त की पत्नी आती है । 
सम्राट विक्रमादित्य- भैरव दत्त तुम अपनी पत्नी का ध्यान रखो । इन्होंने बहुत कष्ट झेले है तुम्हारे बिना । हमारी बहन का ध्यान रखना ।

तो ऐसे थे हमारे चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य जिनके लिए प्रजा के हर एक व्यक्ति के जीवन का महत्व था । 

जय चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य

Comments

Popular posts from this blog

राजा विक्रमादित्य और 32 पुतलियों की कथा प्रश्न

विक्रम बैताल || कहानी 604 || 32 पुतलियों की कहानी [भाग 4] अगली आठ कहानियां

विक्रमादित्य की परीक्षा: 32 पुतलियों के प्रश्न