विक्रम बैताल || कहानी 505 || भर्तहरी को राज्य और विक्रम को जीवनदान
विक्रम बैताल || कहानी 505 || भर्तहरी को राज्य और विक्रम को जीवनदान पिछले एपिसोड में आपने देखा की वीरमति अपने पुत्रों के साथ जंगल में थी की तभी वहां पर विक्रम को विषधर ने डस लिया और भारधारी क्रिया का सामान लेने के लिए शहर की ओर चल दिया। भर्तहरी नाग के डसने से मृत हुए अपने छोटे भाई की अंतिम क्रिया के लिए सामान लेने के लिए विक्रम नगरी की ओर चल दिया और माता और रोती बिलखती विक्रम के शव की सुरक्षा हेतु वहीं रह गई। भर्तहरी अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुण तो थे ही परंतु बहुत ही बुद्धिमान भी थे । वह अपने पिता से यह सारी विधाएं सीखे चुके थे। वह धीरे-धीरे नगरी की ओर बढ़ते जा रहे थे। उनके दिमाग में माता का रुद्र क्रंदन और भाई का शांत जमीन पर लेट होना और पास में नाग के दो टुकड़े बराबर दिमाग में कौंध रहे थे । लगातार कई घंटे तक नगरी की ओर चलकर भर्तहरी नगरी के द्वार पर पहुंचे जैसे ही भर्तहरी ने नगरी में प्रवेश किया नगर रक्षकों ने उसे बंदी बना लिया। भर्तहरी बोला मुझे छोड़ दो मेरा भाई जंगल में मृत पड़ा हुआ है मुझे उसकी क्रिया करनी है। उसके बाद मुझे आप चाहे तो पकड़ लेना। मैं एक क्षत्रिय बालक...