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Showing posts from October, 2023

110. विक्रम बैताल || कहानी 10 || खाने का दाम || लकड़हारे की चार मुद्राएं

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विक्रम बेताल और लकड़हारे की चार मुद्राएं उचित समय आने पर राजा अकेला योगी के मठ पर जा पहुँचा। योगी ने उसे अपने पास बिठा लिया। थोड़ी देर बैठकर राजा विक्रम ने पूछा, “महाराज, मेरे लिए क्या आज्ञा है?” योगी ने कहा, “राजन्, यहाँ से दक्षिण दिशा में दो कोस की दूरी पर शमशान में एक सिरस के पेड़ पर एक मुर्दा उल्टा लटका हुआ है। उसे मेरे पास ले आओ, तब तक मैं यहाँ पूजा करता हूँ।” यह सुनकर राजा विक्रम अपने वचन को पूरा करने के लिए शमशान की ओर चल दिया। बड़ी भयंकर रात थी। चारों ओर अँधेरा फैला था। पानी बरस रहा था। भूत-प्रेत शोर मचा रहे थे। साँप आ-आकर पैरों में लिपट जाते थे। लेकिन हर बाधा को दूर करते हुए निडर राजा विक्रम आगे बढ़ता गया।  जब वह शमशान में पहुँचा तो देखता क्या है कि शेर दहाड़ रहे हैं, हाथी चिंघाड़ रहे हैं, भूत-प्रेत आदमियों को मार रहे हैं। राजा बेधड़क चलता गया और सिरस के पेड़ के पास पहुँच गया। पेड़ पर रस्सी से बँधा मुर्दा लटक रहा था। पेड़ जड़ से फुनगी तक आग से दहक रहा था। राजा ने सोचा, हो-न-हो, यह वही योगी है, जिसकी बात योगी ने बतायी थी। राजा पेड़ पर चढ़ गया और तलवार से रस्सी काट दी। मुर्द...

विक्रम बैताल || कहानी 604 || 32 पुतलियों की कहानी [भाग 4] अगली आठ कहानियां

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विक्रम बैताल || कहानी 604 || 32 पुतलियों की कहानी [भाग 4] अगली आठ कहानियां  सिंहासन बत्तीसी की कहानी / The Thirty Two Tales of THE THRONE चौथे भाग में आप सुनेंगे विक्रमादित्य के सिंहासन से संबंधित अगली आठ कहानियां। 25. विक्रमादित्य का करुण हृदय राजा भोज को पुतली ने पुनः सिंहासन पर बैठने से रोकते हुए कहा :-- एक बार राजा विक्रमादित्य के दरबार में एक महान ज्येतिषाचार्य पधारे, राजा ने उनका सत्कार किया और उत्सुक्ता वश पूछा की गृह नक्षत्र कैसे है?  ज्योतिषाचार्य कुछ गणना कर बोले हे राजन ! नक्षत्रों के हिसाब से अगले बारह वर्षो तक धरती पर वर्षा नहीं होगी।  राजा चिंतित होकर बोले इसे रोकने का कोई उपाय है आचार्य? ज्येतिषाचार्य बोले राजन आपको वरुण देव को प्रसन्न करने के लिये अनुष्ठान करना होगा और इंद्र को प्रसन्न करने के लिए ब्राहमणो को भोज, दानादि करना होगा, राजा ने ऐसा ही किया परन्तु वर्षा नही हुई। राजा दुखी हो गए तभी आकाशवाणी हुई की जब तक 65 राक्षसियों को नर मांस से संतुष्ट नही किया जायेगा तब तक वर्षा नहीं होंगी। राजन बोलें यदि एक जीवन के बलिदान से सम्पूर्ण जगत को जलाम...

विक्रम बैताल || कहानी 603 || 32 पुतलियों की कहानी [भाग 3] अगली आठ कहानियां

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विक्रम बैताल || कहानी 603 || 32 पुतलियों की कहानी [भाग 3] अगली आठ कहानियां  सिंहासन बत्तीसी की कहानी / The Thirty Two Tales of THE THRONE तीसरे भाग में आप सुनेंगे विक्रमादित्य के सिंहासन से संबंधित अगली आठ कहानियां। 17. महाउदार व महात्यागी विक्रमादित्य जब राजा भोज फिर एक बार विक्रमादित्य के सिंहासन पर बैठने लगे तो पुतली ने उनसे रोकते हुए कहाः एक बार विक्रमादित्य के राजकवि एक अन्य राज्य में पहुँचे जहाँ पर उन्होंने विक्रम की महानता का गुणगान किया। इस पर उस राज्य के राजा ने कवि से पूछा कि आप अपने सम्राट की प्रशंसा का गुणगान कर रहें है ऐसा क्या हैं सम्राट में ? इस पर राजकवि ने कहा कि "विक्रमादित्य जैसा वीर व साहसी राजा कोई दूसरा नहीं है। " यह सुनकर राजा ने एक विशाल पात्र में उबलता हुआ तेल रखवाया और एक जादूगरनी को प्रसन्न करने के लिये स्वयं को उस उबलते हुए तेल के कढ़ाव में अर्पित कर दिया। इसे देखकर उस मोहनी जादूगरनी ने प्रसन्न होकर राजा से वरदान मांगने को कहा इस पर राजा ने कहा कि "हर दिन मेरे सात महल स्वर्ण से भर जाएँ ताकि शाम तक वह स्वर्ण दान करता रहे" इस प्...

विक्रम बैताल || कहानी 602 || 32 पुतलियों की कहानी [भाग 2] अगली आठ कहानियां

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विक्रम बैताल || कहानी 602 || 32 पुतलियों की कहानी [भाग 2] आगे की आठ कहानियां  सिंहासन बत्तीसी की कहानी / The Thirty Two Tales of THE THRONE दूसरे भाग में आप सुनेंगे विक्रमादित्य के सिंहासन से संबंधित अगली आठ कहानियां। 9. उदार विक्रमादित्य नौंवी पुतली ने राजा भोज से कहा कि क्या उनमें विक्रमादित्य जैसी उदारता है। इसे सुनकर राजा भोज ने पुतली को विक्रमादित्य की उदारता की कहानी सुनाने को कहा।  पुतली ने कहा, एक बार राजा विक्रमादित्य ने अपने एक सेवक को बनारस जाकर राजा की ओर से भगवान विश्वनाथ की पूजा करने का आदेश दिया। पूजा पूरी करके बनारस से लौटते हुए सेवक रास्ते में एक नगर में एक राजा की पुत्री, जिसका नाम नरमोहिनी था, की अपूर्व सुन्दरता से मुग्ध हो गया, लेकिन जो भी नरमोहिनी के मोहपाश में पड़कर उसके पास रात को जाता। वह सुबह मृत पाया जाता रात्रि को क्या होता था इस रहस्य को कोई नहीं जान पाया।  यद्यपि विक्रमादित्य का सेवक भी नरमोहिनी को पाने की चाहत रखता था लेकिन मृत्यु के डर से उसने विक्रमादित्य के पास लौटकर उन्हें पूरी कहानी बताई। कहानी सुनकर विक्रमादित्य अपने सेवक के...

विक्रम बैताल || कहानी 601 || 32 पुतलियों की कहानी [भाग 1] प्रथम आठ कहानियां

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विक्रम बैताल || कहानी 601 || 32 पुतलियों की कहानी [भाग 1] प्रथम आठ कहानियां  सिंहासन बत्तीसी की कहानी / The Thirty Two Tales of THE THRONE पहला भाग में आप सुनेंगे विक्रमादित्य के सिंहासन से संबंधित आठ कहानी। 1. विक्रमादित्य की उदार दानवृत्ति जैसे ही राजा भोज सिंहासन पर आरूढ़ होने को बढ़ा, तभी पहली पुतली ने कहा :- हे राजन ! यह दानवीर राजा विक्रमादित्य का सिंहासन है। जिन्होंने अपने खजांची को निर्देशित किया था कि यदि मैं किसी भिक्षुक को देखभर लूं तो एक हजार (1,000) निष्क (सर्वण मुद्रा), जिसके साथ 'शब्दभर वार्तालाप कर लूं उसे दस हजार (10,000) निष्क, जिसकी तरफ मुस्कुराऊं उसे एक लाख (1,00,000) निष्क और जिस पर प्रसन्न हो जाऊं उसे एक करोड़ (1,00,00,000) निष्क दान दिये जाएं। हे राजा भोज ! यदि ऐसी दानवृत्ति आप में है तो आप इस सिंहासन का आरोहण कर सकते हैं। 2. परोपकारी राजा विक्रमादित्य जैसे ही राजा भोज ने विक्रमादित्य के सिंहासन पर बैठने की कोशिश की तो दूसरी पुतली ने उनसे कहा कि वही इस सिंहासन पर बैठ सकता है। जिसमें विक्रमादिला जैसा साहस व उदारता हो।  दूसरी पुतली ...