नौंवा गुण कर्तव्य
।। नौंवा गुण कर्तव्य ।। राजा भोज जैसे ही आगे बडते है नौंवी सिडी पर तभी कर्तव्य की देवी उन्हें रोकती है और कहती है राजन् रूकिए । राजा भोज - देवी में सम्राट विक्रमादित्य के कर्तव्य की कथा सुनाए । देवी - अवश्य एक समय की बात है जब अर्ध रात्री का समय था सभी लोग शांति से निद्रा में थे तभी चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के न्याय का घंटा बच उठा । सैनिक - आचार्य जी यही वो बालक है जिसने न्याय माँगा है । वराहमिहिर जी - बालक न्याय का घंटा बजाने का अर्थ पता है । बालक - हाँ जानता हूं इसलिए बजाया । वराहमिहिर जी - यानी तुम्हारे साथ किसी ने अन्याय किया है किसने किया है अन्याय । बालक - क्या आप ही चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य है । वराहमिहिर जी - नहीं में सम्राट नही हूं में चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य का आचार्य हूं । बताओ मुझे क्या हुआ तुम्हारे साथ । बालक - नहीं में उन्हें ही बता पाऊंगा । वराहमिहिर जी - बालक सम्राट विक्रमादित्य अभी राज्य भ्रमण पर निकले है उनका कोई समय नही है की कब लौटे इसलिए तुम मुझे बताओ । बालक - यदि आप मेरी समस्या का समाधान कर सकते है तो सुनिए मेरी समस्या है मेरा जीवन । वराहमिहिर जी -...