सत्ताइसवा गुण आदर्श राजा
।। सत्ताइसवा गुण आदर्श राजा ।।
सम्राट विक्रमादित्य सभा में बैठे थे । तभी कुछ शोर होता है महाराज महाराज का ।
सम्राट विक्रमादित्य - मंत्री जी यह शोर कैसा ।
मंत्री - सम्राट आपसे कुछ व्यापारी मिलने आए है ।
सम्राट विक्रमादित्य - उन सभी को बुलाया जाए । तभी कुछ व्यापारी उनसे मिलने आते है ।
व्यापारी - चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य प्रणाम । सम्राट हम व्यापार के लिए पड़ोसी राज्य में जाते है वहां का मुख्य अधिकारी चुरकट मल जो वहां के राजा लल्लूनंदन का साला है । वो हमें हर बार किसी ना किसी तरह लूट लेता है महाराज ।
सम्राट विक्रमादित्य - क्या ।
व्यापारी - हा महाराज वो हर बार हमारे लिए समस्या पैदा करता है । कुछ कीजिए महाराज ।
सम्राट विक्रमादित्य - ठीक है आप चिंता ना करे हम कुछ करते है । सेनापति जी और वित्त मंत्री जी आप दोनो रात को हमारी निजी बैठक में आए ।
सेनापति और वित्त मंत्री - प्रणाम सम्राट ।
सम्राट विक्रमादित्य - आइए स्थान ग्रहण करे ।
सेनापति - सम्राट हमें एक छोटी सेना बनाकर हमला कर देना चाहिए ।
वित्त मंत्री - नही सेनापति जी यह सही नही है हम अपने से कमजोर राज्य पर इस तरह हमला नही कर सकते । और सम्राट तो आदर्श राजा है विश्व के लिए उदाहरण है हमें यह शोभा नही देता ।
सम्राट विक्रमादित्य - हां सेनापति मंत्री जी सही कह रहे है । हमारा शत्रु केवल चुरकट मल है हमें स्थानीय प्रजा के हित और कल्याण के बारे में सोच कर ही निर्णय लेना होगा ।
सेनापति - धन्य है सम्राट आप , आप आदर्श राजा है हर राज्य की प्रजा को आप चक्रवर्ती सम्राट होने के नाते एक समान मानते है आप । आपका निर्णय सही है आप ही बताए क्या करना चाहिए ।
सम्राट विक्रमादित्य - हम भेष बदल कर जाएंगे उस राज्य में ।
" सम्राट विक्रमादित्य और मुंजा उस राज्य में भेष बदलकर जाते है "
मुंजा - सम्राट वहां देखो विश्राम गृह हम शुरूआत वहीं से करते है व्यापारी वहीं रुकते होंगे ।
सम्राट विक्रमादित्य - हा चलो वहीं ।
सम्राट विक्रमादित्य - हम यहां रूकना चाहते है ।
विश्राम गृह संचालक - जी आप क्या करते है ।
मुंजा - यह बहुत बड़े कपडा व्यापारी है निमाड़ के ।
विश्राम गृह संचालक - जी जी आइए आप यहां रूक सकते है ।
" विश्राम गृह संचालक मन ही मन सोचता है की यह बड़ा व्यापारी है चुरकट मल को इसकी जानकारी दे देता हूं "
मुंजा - महाराज आप कक्ष में विश्राम करिए हम नगर का भ्रमण करते है ।
सम्राट विक्रमादित्य - ठीक है तुम देखकर आओ और बताओ हमें ।
विश्राम गृह संचालक - मुख्य अधिकारी चुरकट मल जी नमस्कार ।
चुरकट मल - हा कहो ।
संचालक - अधिकारी जी निमाड़ राज्य से हमारे राज्य में एक बहुत बडा कपडा व्यापारी आया है ।
चुरकट मल - तुमने अच्छी खबर दी चिंता मत करो तुम्हे तुम्हारा हिस्सा मिल जाएगा । हम अभी नगर कोतवाल को भेजते है ।
मुंजा - सम्राट हम आ गए है । और आप जल्दी चलिए यहां से ।
सम्राट विक्रमादित्य - क्यो क्या हुआ ।
मुंजा - सम्राट आपको बंदी बनाने का आदेश दिया है चुरकट मल ने ।
सम्राट विक्रमादित्य - इस राज्य की गृह नीति खराब है व्यापारी को लूटने के लिए नगर कोतवाल का उपयोग ।
मुंजा - सम्राट इस राज्य का तो भगवान ही मालिक है । यहां छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा व्यापारी लूट रहा है । देश में मिलावट से लेकर कपडे बेचने में लूट वह अनाज तक में चौरी हो रही है ।
सम्राट विक्रमादित्य - हमें इस राज्य का भला करना ही होगा । आओ शुरूआत इस नाई से करते है ।
सम्राट विक्रमादित्य - मुंजा इस राज्य में सभी ठग है हमें इन्हे इनकी भाषा में ही ठगना होगा ।
मुंजा - चलिए महाराज इस नाई से ही शुरूआत करते हे यह नाई पैसे वाले का काम जल्दी करता है ।
सम्राट विक्रमादित्य - आओ देखते है ।
सम्राट विक्रमादित्य - अरे नाई हमारे बाल काट दो ।
नाई - हां बैठ जाओ अभी भीड है ।
सम्राट विक्रमादित्य - अरे धीरे से सुनो हम तुम्हे दोगुना दाम देंगे ।
नाई - ठीक है तो आओ बैठो ।
दूसरे लोग - अरे भाई हमारी बारी है ।
नाई - अरे भाई बड़े व्यापारी है अभी हो जाएगा जल्द कर दूंगा बैठो ।
सम्राट विक्रमादित्य - वा भाई अच्छे बाल काटे तुमने । यह लो धन ।
नाई - ठीक है ।
सम्राट विक्रमादित्य - अरे ठीक है क्या हमे हमारा धन तो वापस करो काट कर ।
नाई - बोवनी नही हुई है बाद में लेना ।
सम्राट विक्रमादित्य - बोवनी हो तो गई तुम्हारी अभी एक ग्राहक तुमसे बाल कटवा के गया । छोडो तुम लाओ मेरा धन आगे से मुझे वस्त्र खरीदने है वहां से तुम्हारा धन तुम्हे दे दूंगा वहां से ।
नाई - हमारी तो दुकान है तुम हमारे बेटे को ले जाओ ।
सम्राट विक्रमादित्य - ठीक है इसे दे दूंगा चलो बेटे ।
सम्राट विक्रमादित्य कपडा व्यापारी के पास जाते है ।
सम्राट विक्रमादित्य - कपडे दिखाओ ।
कपडा व्यापारी - यह देखो और यह इतने दाम का है ।
सम्राट विक्रमादित्य - कपडे अच्छा है दाम बहुत अधिक है तीन गुणा अधिक ।
कपडा व्यापारी - हम तो यही लेते है भाई लेना हो तो लो ।
सम्राट विक्रमादित्य - अरे नही भाई हम तो लेंगे ही एक काम करो यह सभी दे दो पूरा कपडा ।
व्यापारी - बिलकुल आपकी बैलगाड़ी में रखना देते है ।
सम्राट विक्रमादित्य वहां से जाने लगते है ।
व्यापारी - अरे भाई पैसे तो दो ।
सम्राट विक्रमादित्य - अरे तुम हमारे साथ चलो । मेरी पत्नी स्वर्ण दुकान पर सोना खरीद रही है वहीं से पैसे ले लेना ।
व्यापारी - हमारी दुकान यही है हम इसे ऐसे नही छोड सकते ।
सम्राट विक्रमादित्य - तुम एक काम करो यह हमारा बेटा है इसे हम यही छोड़ कर जा रहे है । हम धन लेकर आते है और इसे ले जाएंगे ।
" काफी देर होने पर व्यापारी उस बच्चे से कहता है तेरे पिता कब आएंगे । बच्चा - वो तो बाल काट रहे होंगे । व्यापारी - झूठ बोल रहा है चल । बच्चा रो देता है तभी उसका पिता आ जाता है । नाई - अरे बेटा तू अब तक आया नही । व्यापारी - यह तेरा बेटा है । अरे बाप रे वो आदमी हम दोनों को मूर्ख बना गया । नाई - सेठ जी आजतक हम दोनों लोगो को ठगते थे आज हमें ही कोई ठग गया । "
मुंजा - महाराज आज चुरकट मल का जमाई आ रहा है 10 वर्ष बाद ।
सम्राट विक्रमादित्य - क्या 10 वर्ष बाद हमें उसके पास ले चलो ।
मुंजा - सम्राट यही है वो ।
सम्राट विक्रमादित्य - हम इसे बंदी बना देते कुछ देर के लिए और हम जाते है इसका भेस बनाकर ।
मुंजा - बहुत अच्छा सुझाव है ।
सम्राट विक्रमादित्य उसे बंदी बना लेते है और उसके भेस में चुरकट मल के यहां जाते है ।
मुंजा - चुरकट मल जी यह आपके दामाद जी है ।
चुरकट मल - आइए आइए दामाद जी आप तो बहुत बड़े हो गए बहुत समय बाद आए ।
सम्राट विक्रमादित्य - जी ससुर जी । हम व्यापार की वजह से आ नही पाए । किंतु अभी हमारा व्यापार बहुत कम हो गया है । आपका सहयोग चाहिए ।
चुरकट मल - बिलकुल दामाद जी । आपको जीतना धन लगे आप ले जाए वह हमारा कक्ष रहा ।
सम्राट विक्रमादित्य - जी जी ससुर जी ।
" सम्राट विक्रमादित्य सारा धन लेकर निकल जाते है वह असली दामाद को आजाद कर देते है " वह रो रो कर आता है ससुर जी ससुर जी । चुरकट मल - कौन हो तुम । दामाद - में हूं आपका दामाद । चुरकट मल - क्या आप तो वो दोनों कौन थे "
चुरकट मल अपने कक्ष में जाता है तो वहां से सब धन गायब हो जाता है । वहां सभी आते है कपडा व्यापारी नाई सभी ठग कहते है चुरकट मल जी हमें ठग है उसने । चुरकट मल - लगते है हमारा काला चिठ्ठा लोग समझ रहे है अब हमें दूसरा राज्य ढूंढना चाहिए । चलो इस धन को हम महाराज को मूर्ख बनाकर वसूलते है ।
सम्राट विक्रमादित्य राजा के पास जाते है । वह उन्हे पूरा घटनाक्रम बताते है ।
राजा - सम्राट आप कह रहे है तो सही ही कह रहे है ।
सम्राट विक्रमादित्य - नही राजा साहब हम आपके सामने प्रमाण लेकर आए है ।
राजा - सम्राट आपका कहना अर्थात सत्य की बात ।
सम्राट विक्रमादित्य - यह देखिए राजा साहब सारा धन यह धन आम जनता का है और कुछ हमारे उज्जैनी के व्यापारी का है ।
राजा - सम्राट इतना सारा धन ।
सम्राट विक्रमादित्य - हां और रात्री को देखिएगा आप वह लोग लूटने आएंगे ।
" आधी रात को चुरकट मल के साथ उसके सभी साथी आते है वह राजकोष का धन लूटने लगते हे तभी सम्राट विक्रमादित्य चुरकट मल को एक लात मारते है "
चुरकट मल - कौन हो तुम पहले तुम्हे कभी देखा नही ।
राजा साहब - यह पृथ्वीपति चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य है ।
चुरकट मल - राजा साहब आप ।
राजा - हां में तुम लोग यह करते हो मेरे पीछे । तुम तो मेरे रिश्तेदार थे ना चुरकट मल फिर मेरे साथ ऐसा धोखा ।
सम्राट विक्रमादित्य - चुरकट मल तेरे जैसे लोगो की वजह से रिश्ते नाते तार तार हो रहे है । तुझे अवश्य दंड मिलेगा । तूने भोली भारी जनता का मजाक बनाया है ।
राजा - चक्रवर्ती सम्राट आप ही इसमें दंड दिजिए ।
सम्राट विक्रमादित्य - चुरकट मल को 10 वर्ष का कारावास दिया जाए और इन सभी को 5 -5 वर्ष का कारावास करिए और इन सभी से वहां कठोर मेहनत करवाए ।
राजा - जो आज्ञा सम्राट । सैनिकों ले जाओ इन सभी को और सम्राट के आदेश का पालन करने इन्हे कारावास भेजो ।
सम्राट विक्रमादित्य - राजा साहब हमने आपसे कहा था यह लोग आपके राज्य को अंदर से कमजोर कर रहे थे ।
राजा - आप सही समय पर आ गए । मंत्री जी जिन लोगो का धन लूटा गया उन सभी को दे दिया जाए । और उज्जैनी के व्यापारीयों का धन भी उन्हे भेज दिया जाए । सम्राट हम आपके जीवन भर आभारी रहेंगे ।
सम्राट विक्रमादित्य - कोई बात नही राजा साहब ।
राजा - सम्राट आपके लिए प्रजा प्रजा में भेद नही है आप सभी को एक समान मानते है आप अपने चक्रवर्ती होने के धर्म का सत्य निष्ठा से पालन कर रहे है ।
सम्राट विक्रमादित्य - हर राजा को अपने प्रजाजनों से मिलकर राज्य की जानकारी रखना चाहिए । प्रजा के हित में कौन से अधिकारी सही है अथवा कौन सा नही देखते रहना चाहिए ।
तो ऐसे थे चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य वे आदर्श राजा थे उनके लिए सम्पूर्ण विश्व की प्रजा एक समान थी प्रजा के हित में वे सदैव कार्य करते थे ।
जय चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य
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