तेरहवा गुण नारीसम्मान
।। तेरहवा गुण नारीसम्मान ।।
जहां होता है नारी का सम्मान वहां होते है देवता महान । नारी जो एक बेटी है , पत्नी है , बहन है , माँ है नारी का सम्मान सम्राट विक्रमादित्य में बहुत उचाई तक था । एक दिन सम्राट विक्रमादित्य अपने संगीत का अभ्यास कर रहे थे । तभी सम्राट विक्रमादित्य को रोने की आवाज आ रही होती है वे ध्यान लगाते है तभी उनके महल से ही उन्हे रोने की आवाज आती है वे उस ध्वनि के पीछे जाते है वहाँ एक महिला जा रही होती है सम्राट को लगता है वे महारानी चित्रलेखा है किंतु फिर वे स्मरण करती है कि महारानी उन्हे बिना बताए कही नही जाती । वे आगे चलकर देखते है तो कई सारी महिलाए हो जाती है वे सब जा रही होती है ।
सम्राट विक्रमादित्य- यह सभी तो कुण्ड की ओर जा रही है ।
सम्राट विक्रमादित्य जैसे ही कुण्ड पर पहुचते है वहां कोई नही होता सम्राट विक्रमादित्य के जाते ही वे दिये भी गायब हो जाते है जो दिये वे सभी स्त्रीया लेकर आती है ।
।। उधर कथा सुनाते हुए देवी कहती है राजन् आप मेरी सहायता करेंगे । राजा भोज- आदेश करिए देवी । देवी- वे सभी महिलाएं दिपक लेकर क्यो जा रही थी और उन सबके दीपक बूझ क्यो गए और वे सभी जोड़े में क्यो थी । राजा भोज- देवी वे सभी महिलाएं दुखी थी और उनके जीवन में पारिवारिक समस्या थी इसलिए वे सब जीवन रूपी अंधकार को खत्म करने के लिए दीपक लेकय जा रही थी और उन सबके दीपक इस वजह से बूझ गए कि उन सभी की समस्याएं अब तक खत्म नही हुई है । देवी - आपने बिल्कुल सही कहा राजन् । राजा भोज- देवी क्या आप मेरी जिज्ञासा शांत करेंगे कि वे सभी स्त्रियाँ थी कौन । देवी- यही जिज्ञासा सम्राट विक्रमादित्य को भी थी क्योकि उनके जीवन में भी यह पहली बार हुआ था । ।
उधर सम्राट विक्रमादित्य महल लौटतै है ।
वराहमिहिर जी - महारानी जी यह देखिए सम्राट आ गए ।
महारानी चित्रलेखा - सम्राट आप कहा चले गए थे ।
सम्राट विक्रमादित्य- देवी हम ठीक है , हमें कुछ स्त्रियाँ दिखी वे दीपक लेकर जा रही थी फिर अचानक वे अदृश्य हो गई फिर में सिद्ध कुंड गया तो वहां दीपक उसमें जल रहे थे और हमारे स्पर्श करते ही वे डूब गए ।
महारानी चित्रलेखा - हो सकता है कि महिलाएं कोई अनुष्ठान करने जा रही हो ।
सम्राट विक्रमादित्य- नही देवी वे हमारे राज्य की भी नही थी और दूसरी महत्वपूर्ण बात दिये बूझ सकते है किंतु नदी में डूब नही सकते वराहमिहिर जी ।
वराहमिहिर जी - सम्राट हमारी गणना के अनुसार वह घड़ी आ चुकी है ।
सम्राट विक्रमादित्य- किस घड़ी की बात कर रहे है आप ।
वराहमिहिर जी - हमारे साथ आइए आप ।
सम्राट विक्रमादित्य- महारानी हम आते है ।
वराहमिहिर जी एक पुस्तक निकालते है ।
सम्राट विक्रमादित्य - वराहमिहिर जी यह पुस्तक तो तंत्र विद्या की पुस्तक लगती है।
वराहमिहिर जी - हां सम्राट यह सबसे पुरानी पुस्तक है इसके अनुमान से वह घड़ी आ चुकी है ।
सम्राट विक्रमादित्य- किस घड़ी की बात कर रहे है आप ।
वराहमिहिर जी - सम्राट प्रेत पक्ष की जिस प्रकार नवरात्री और पितृ पक्ष आता है उसी तरह प्रेत पक्ष आता है किंतु यह हर वर्ष नही सदी में एक बार आता है और इस सदी में यह आज से शुरू हो चुका है और सम्राट वे सभी स्त्रियाँ आत्मा थी ।
सम्राट विक्रमादित्य- वराहमिहिर जी इससे हमारे राज्य को कुछ खतरा तो नही ।
वराहमिहिर जी - सम्राट वे आत्माएं 15 दिनों के लिए जीवित हो जाती है वे मंगल भी कर सकती है और अमंगल भी ।
अगले दिन दरबार में राज्य से अजीबो-गरीब घटनाएँ सामने आती है ।
प्रजा में से एक सम्राट मेरी बहू ने मुझे रात को पीटा । नही सम्राट मेरी पत्नी ने मेरी मां को नही पीटा वो तो अपने मायके में थी । नही सम्राट मेरी बहू ने ही मुझे मारा है । वही दूसरी तरफ एक पिता पुत्र आते है पुत्र- सम्राट मेरे पिता की वजह से मेरी शादी नही हो पाई उन्हे दहेज चाहिए था । पिता- नही सम्राट मेरा पुत्र कल रात से पागल हो गया है । पुत्र - सम्राट वो स्त्री मुझे नही छोड़ेगी उसने मेरी यह हालत कर दी है ।
सम्राट विक्रमादित्य- आप सब चिंता ना करे आप सभी जाइए हम जल्द से जल्द यह समस्या खत्म खर देंगे ।
सम्राट विक्रमादित्य- आज रात हम इस रहस्य को जान कर ही आएंगे ।
सम्राट विक्रमादित्य राज्य में निकलते है सभी प्रजा घरों के बाहर खड़ी रहती है रात में ।
सम्राट विक्रमादित्य- आप सभी अपने अपने घरों से बाहर क्यो है ।
प्रजा - भय सम्राट की जो कल लोगों के साथ हुआ आज वही हमारे साथ भी होगा ।
सम्राट विक्रमादित्य- नही आप सभी चिंता मत किजिए हम आज रात भर आपकी सुरक्षा के लिए रात भर राज्य का भ्रणण करेंगे आप सभी कृपया अपने अपने घरों में जाकर विश्राम किजिए हम है आप सबकी रक्षा के लिए यह हमारा वचन है ।
सम्राट विक्रमादित्य को फिर वही रूदन सुनाई देता है सम्राट उस आवाज के पीछे जाते है तो वहाँ कुछ स्त्रियां बैठी होती है और वे विधाता को रोते हुए शिकायत सुनाती है ।
एक स्त्री- विधाता तूने मुझे किस कर्म की सजा दी तूने मुझे निसंतान क्यो रखा जिस वजह से मुझे मरना पढा ।
दूसरी स्त्री- मेरे पति ने मेरे होते हुए दूसरी शादी की मुझमें क्या कमी थी विधाता ।
तीसरी स्त्री- मुझे ऐसा अभागा क्यो बनाया विधाता की धन की कमी की वजह से मेरा विवाह ही नही हो पाया ।
हम सबके साथ इस संसार ने बहुत गलत किया मगर अब हम सबसे बदला लेंगे ।
सम्राट विक्रमादित्य उन सबके बीच आते है देवियों हम इस विश्व के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य है आप सब हमें बताएं हम आप सबके साथ न्याय करेंगे ।
सभी स्त्रियाँ उन पर हस्ती है और वहां से गायब हो जाती है ।
।। उधर कथा सुनाते हुए देवी कहती है राजन् मनुष्य के जीवन सुख दुःख तो चलता रहता है फिर उन सभी स्त्रियाँ के मरने के बाद भी उनमें इतना प्रतिशोध क्यो । राजा भोज- देवी इंसान के जीवन में कुछ घटनाएं ऐसी होती है जो ना केवल उनके शरीर अपितु उनकी आत्मा तक को झकझोर देती है इस वजह से उनमें प्रतिशोध की भावना थी उन स्त्रियों के साथ अवश्य कुछ ऐसा घठा है जिसकी वजह से उनकी आत्मा अभी भी उनका शरीर छोड नही पा रही है और वो प्रतिशोध का रूप धारण कर चुकी है । देवी- वे सभी स्त्रियाँ सदियों से सताई हुई थी ।
उधर सम्राट विक्रमादित्य कहते है यह सब प्रेत पक्ष की वजह से हो रहा है वराहमिहिर जी और क्या क्या दुष्परिणाम होंगे इसके ।
वराहमिहिर जी - सम्राट यह सभी आत्माएं एक एक करके सबसे बदला लेंगी जिनकी वजह से उन्हें दुख हुआ है या उनके जैसे लोंगो को सताएगी ।
सम्राट विक्रमादित्य- मगर यह सब सही नही है हमें उन स्त्रियों के लिए कुछ करना होगा हमारे राज्य में एक भी स्त्री का अपमान नही होना चाहिए चाहे वो जीवित हो या मृत हम उन सभी को न्याय दिलाएंगे ।
उसी रात नगर में तीन घठनाएं हुई एक पुरूष अपनो पत्नी को घर से बाहर निकाल रहा होता है तभी वे आत्माएं आकर उसे दण्ड देती है वही दूसरी जगह एक पंडित चर्चा करता है कि स्त्री को समाज में ज्यादा सम्मान मिलना गलत है वे और पशु एक समान है उस व्यक्ति को वे आत्माएं हवा में खड़ा कर देती है वही तीसरी ओर एक स्त्री रात को आ रही होती है तभी दो पुरूष उसे रोकते है उसके करीब जाने की कोशिश करते है वह स्त्री बचाओ बचाओ कहती है तभी वे आत्माएं उन दों पुरूषों को लकवा कर देती है ।
वही सम्राट विक्रमादित्य नगर भ्रमण पर होते है तभी वे देखते है पंडित हवा में होते है ।
सम्राट विक्रमादित्य- आपको क्या हुआ है हम आपकी सहायता करते है पर वह पंडित ओर उपर चला जाता है वह कहता है सम्राट मेरी मदद मत किजिए वरना मेरे साथ ओर बुरा होगा तभी दो लोग कहते है सम्राट यह स्त्री अपमान का संदेश दे रहे थे ।
सम्राट विक्रमादित्य- जभी इनके साथ ऐसा हो रहा है तभी गूंगा इंसान आता है उसकी पत्नी सम्राट मेरे पति गूंगे हो गए मेरा अपमान कर रहे थे । वही वे लकवाग्रस्त पुरूष आकर कहते है सम्राट हमारी बूरी दृष्टी थी स्त्री पर इसलिए हमारे साथ ऐसा हुआ प्रायश्चित का मौका दिजिए ।
सम्राट विक्रमादित्य- न्याय कहते है तुम दोनो की आंखे निकाल लू स्त्री अपमान पर मगर इससे सारा संसार अंधा हो जाएगा । वराहमिहिर जी हमें बीच का रास्ता निकालना होगा ।
वराहमिहिर जी- सम्राट आप सम्मोहन के द्वारा उनसे बात किजिए ।
सम्राट विक्रमादित्य अपने दोनों हाथों में दीपक रखकर मंत्र जाप करते है ।
महारानी चित्रलेखा - महिलाओं का अपमान करने वालो के साथ ही वे स्त्रियाँ ऐसा कर रही है ।
पुरूष प्रजा - महारानी जी ऐसे तो हम सब ने अंजाने में अपनी पत्नी का अपमान किया होगा तो क्या हम सबको दंड मिलेगा ।
महारानी चित्रलेखा- पहले का तो पता नही मगर अब होने पर वे आत्माएं दंड देगी ।
सम्राट विक्रमादित्य सभी स्त्रियों को बुलाते है वे सभी आती है और कहती है क्यों बुलाया आपने यहाँ और कौन हो आप ?
सम्राट विक्रमादित्य- हम उज्जैनी नरेश चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य है आप सबकी समस्या दूर करने आए है ।
स्त्रियाँ- हमारी मदद कोई पुरूष नही कर सकता सम्राट ।
सम्राट विक्रमादित्य- ऐसा नही है देवी जिस प्रकार हाथों की पांच उंगलियां एक नही होती वैसे ही हर पुरूष गलत नही होता सब एक जैसे नही होते ।
स्त्रियां- हमें आपसे कोई बात नही करना है सम्राट ।
और सभी स्त्रियां वहां से चली जाती है तभी सम्राट विक्रमादित्य को बेताल की याद आती है वे उनके पास जाते है।
सम्राट विक्रमादित्य बेताल को पुकारते है बेताल हमें तुमसे काम है सामने आओ ।
बेताल - बोलो विक्रमादित्य हम तुम्हारे पीछे ही है मगर में नगर में जा रहा हूं हलवा पूरी खाने ।
सम्राट विक्रमादित्य- तुम वहां जा ही क्यो रहे हो हमें तुमसे काम है ।
बेताल - जाओ नही करता में काम अरे ब्राह्मण बेताल हूं मुझे भूख लगती है अच्छे व्यंजन पंसद है क्या तुमने मुझे कभी बुलाया अभी काम है तो आ गए ।
सम्राट विक्रमादित्य- बेताल तुम जानते हो मैने तुम्हारी कही बार सहायता की है । मित्र हमें तुम्हारी आवश्यकता है हमारी मदद करो तुमने हमें वचन दिया था की तुम हमारी मदद करोगे ।
बेताल- अरे हां में व्यंग्य कर रहा था बोलो सम्राट विक्रमादित्य में आपकी सहायता जरूर करूंगा ।
सम्राट विक्रमादित्य पूरी बात बताते है बेताल को ।
बेताल - मुझे उस जगह ले चलो मगर में तुम्हारी पीठ पर ही जाऊंगा ।
सम्राट विक्रमादित्य- हां चलो ।
बेताल वहां पहुंच कर देखता है फिर वह कहता है विक्रमादित्य तुमें इस रहस्य का पता इस कुंड में उतरने के बाद ही चलेगा ।
सम्राट विक्रमादित्य उस कुंड में उतरते है उसके बाद उन्हे वहां पुरानी इमारत दिखती है जिसके अंदर एक यज्ञ कुंड होता है । बेताल भी उनके साथ ही होता है तभी सम्राट विक्रमादित्य को उस यज्ञ कुंड से आवाज सुनाई देती है तभी बेताल अपनी स्मरण शक्ति से कुछ देखता है ।
बेताल - सम्राट तुम सिर्फ सुन पा रहे हो में तो देख रहा हूं यहां उनके साथ बहुत अत्याचार हुआ है ।
सम्राट विक्रमादित्य- क्या देख पा रहे हो तुम ।
बेताल - विक्रम यहां सैकडों वर्ष पहले भोगानंद रहता था और वो इस मूर्ती के नीचे योग करता था विक्रम उस समय लोग भोगानंद को भगवान मानते थे तुम भी देखो में दिखाता हूं ।
बेताल अपनी शक्ति से भोगानंद का बताता है ।
एक पिता अपनी पुत्री के साथ आता है स्वामी जी मेरी बेटी का विवाह नही हो पा रहा है धन की कमी की वजह से कुछ उपाय दिजिए की में कैसे पितृ ऋण से मुक्त हो पाऊंगा ।
भोगानंद - इस स्त्री को भैरव की शरण में अर्थात यही आश्रम में छोड दो यह यही सेवा करेगी और तुम्हारा पितृ ऋण भी उतर जाएगा ।
वह पिता अपनी पुत्री को छोडकर चला जाता है ।
सम्राट विक्रमादित्य कहते है बेताल कोई पिता ऐसा कैसे हो सकता है । बेताल - विक्रम उसकी वाणी को लोग भगवान की वाणी कहते थे ।
दूसरी स्त्री अपनी सांस के साथ आती है ।
सांस - बहू आशीर्वाद लो बाबा का ।
भोगानंद - यह स्त्री तुम्हारे लिए अशुभ है अगर यह एक दिन और रही तो तुम्हारा बेटा मर जाएगा ।
सांस - आज से तुम यही रहोगी ।
बहू - मांझी ऐसा मत कहो ।
वही तीसरी ओर एक पति अपनी पत्नी को लाकर कहते है स्वामी जी मेरी पत्नी मुझे संतान नही दे पा रही यह बांझ है ।
भोगानंद - यह लडकी विवाह के लिए नही बनी है इसे यही छोड दो भैरव की शरण में यह पूजा करेगी ।
स्त्री- तुम पाखंडी हो सब पुरूष एक जैसे होते है ।
भोगानंद- इस स्त्री को आश्रम में ले जाओ ।
भोगानंद कहता है हम इन सभी स्त्रियों की शक्ति को खुद में धारण करेंगे ।
उधर सम्राट विक्रमादित्य कहते है बस बेताल अब हम नही सुन पाएंगे उन सभी स्त्रियों का दुख हमसे देखा नही जाता हम उनका सम्मान उन्हें दिलवाएंगे ।
बेताल - विक्रम तुम उसी के लिए तो आए हो तुम्हारा जन्म ही संसार के दुख दूर करने के लिए हुआ है तुमने हर बार संसार का दुख खुद के उपर लिया है ।
सम्राट विक्रमादित्य- बेताल में सौभाग्य शाली हूं जो मेरा जन्म लोगों के दुख दूर करने के लिए हुआ है ।
सम्राट विक्रमादित्य सभी स्त्रियों को स्मरण कर उन्हें प्रणाम करते है और कहते है हम सभी स्त्रियों को उनका सम्मान दिलाकर रहेंगे ।
सभी प्रेत आत्माएं बाते कर रही होती है । हमारे पास अब सिर्फ 12 दिन शेष है हमें बदला लेना है उन पुरूषों से ।
सम्राट विक्रमादित्य- देवी हम आप सबकी सहायता करना चाहते है।
स्त्रियां- सम्राट तुम यहां से चले जाओ हमें किसी पुरूष की सहायता नही चाहिए ।
सम्राट विक्रमादित्य- देवी हम सब जैसे नही है विश्वास करे हमारा ।
स्त्रियां- सम्राट विक्रमादित्य आप एक बले पुरूष लगते है सम्राट आज कैसे न्याय दिलाएंगे हमें , पुरूष प्रधान समाज में एक महिला की जरूरत केवल उपयोगी होने तक है में एक बांझ थी इसलिए मेरे परिवार ने मुझे भोगानंद के पास छोड दिया और सम्राट यह इसे इसके पति ने सिर्फ इसलिए छोड दिया की उसे दूसरी शादी करनी थी और सम्राट यह स्नान पर्व में खो गई तो भोगानंद उसे उठा ले आया ।
सम्राट विक्रमादित्य- देवी भोगानंद तो एक आचार्य था ।
स्त्रियां- वो आचार्य नही आचार हीन पुरूष था उसने एक एक करके हम सभी का भोग किया फिर हमारी शक्ति लेकर हमारे मृत शरीर को कुंड में डाल दिया ।
सम्राट विक्रमादित्य- आप सबके साथ बहुत अत्याचार हुआ है हम आपको न्याय दिलाएंगे ।
स्त्रियां- हमें न्याय नही प्रतिशोध चाहिए हम प्रतिशोध लेकर रहेंगे ।
और वे सभी वहां से चली जाती है ।
सम्राट विक्रमादित्य- बेताल हमारी मदद करो ।
बेताल - में तुम्हारी मदद नही कर सकता विक्रम ।
सम्राट विक्रमादित्य- याद करो बेताल हमने हर बार तुम्हारी सहायता की बाकि कोई बात नही हम खुद ढूंढेंगे इस समस्या का हल ।
बेताल- अरे विक्रम में आऊंगा अब इस समस्या का हल निकाल कर ।
उधर सम्राट विक्रमादित्य महल लौटकर कर आते है।
महारानी चित्रलेखा - सम्राट क्या हुआ ।
सम्राट विक्रमादित्य महारानी चित्रलेखा को पूरी बात बताते है ।
उधर बेताल को उपाय मिल जाता है वह सोचता है भोगानंद को जीवित करके रास्ता निकाला जा सकता है ।
उधर कथा सुनते हुए राजा भोज कहते है देवी यह क्या बेताल तो गलत बात कर रहा था । देवी - राजन् बेताल उल्टी बाते तो करता था परंतु वह बोलता बिल्कुल सटीक था । राजा भोज- वैसे देवी बेताल की बात में गहराई तो थी भोगानंद को जीवित करके वे स्त्रियां उस से अपना प्रतिशोध ले सकती है । देवी - हां राजन् आइए देखते है आगे क्या होता है ।
उधर बेताल यह बात सम्राट विक्रमादित्य को कहता है कि भोगानंद को जीवित करना होगा ।
सम्राट विक्रमादित्य- बेताल तुम हमारी मुसीबत बढाने आए हो क्या 100 वर्ष पूर्व मरे इंसान को कैसे जीवित करा जा सकता है ।
बेताल- जां में तुझे नही बताता फिर ।
सम्राट विक्रमादित्य- तुम रुष्ट हो गए मित्र ।
बेताल- हां हो गया अब जा रहा हूं में ।
महारानी चित्रलेखा - बेताल आपके मित्र ने तो नही पूछा हम पूछते है आपसे कैसे है आप ।
बेताल - सिख कुछ सिख अपनी पत्नी से । अरे विक्रम अपनी शक्ति को क्यो भूल रहे हो तुम तुम देवताओं के प्रतिनिधि हो अरे हनुमान जी की तरह तुम भी अपनी शक्ति भूल गए हो क्या।
बेताल यह कह कर चला जाता है फिर सम्राट विक्रमादित्य वराहमिहिर जी से पूछते है ।
वराहमिहिर जी - सम्राट भोगानंद हाल फिलहाल में मरता तो बात थी उसे मरे समय हो गया हमें पहले यह पता करना पढेगा की अभी उसे किस योनी में जन्म मिला है ।
सम्राट विक्रमादित्य- इसका पता सिर्फ आर्य मां ही हमें दे सकते है हमें तुरंत पितृ लोक जाना होगा ।
महारानी चित्रलेखा सम्राट से कहती है सम्राट आपके चेहरे की मुस्कुराहट से लगता है आपको उपाय मिल गया ।
सम्राट विक्रमादित्य- हां महारानी बेताल ने सच ही कहा था हम अपनी शक्तियों को पहचान नही सके ।
महारानी चित्रलेखा - सम्राट हर एक के जीवन में एक ऐसा मित्र होना चाहिए जो उसे अच्छी सलाह दे और मां की तरह गुस्सा करके समझाए आप धन्य है जो आपके पास ऐसा मित्र है ।
सम्राट विक्रमादित्य- आपने सच कहा महारानी बेताल जैसा मित्र और आप जैसी पत्नी पाकर हम धन्य हो गए । महारानी अब हम चलते है अपने उद्देश्य की ओर आप अपना ख्याल रखिएगा ।
सम्राट विक्रमादित्य पितृ लोक जाते है वहां वे आर्य मां से मिलते है ।
आर्य मां - पधारिए चक्रवर्ती सम्राट कैसे आना हुआ ।
सम्राट विक्रमादित्य- प्रणाम । हम आपसे भोगानंद का पूछने आए है उसका पूर्ण जन्म हुआ ।
आर्य मां - सम्राट उसने इतने बूरे कर्म किए की वो 100 वर्ष तो क्या हजारों वर्ष तक जन्म नही ले पाएगा ।
सम्राट विक्रमादित्य- धन्यावाद हमें बताने के लिए । हमें बेताल के पास जाना होगा इसे पूर्णजीवित करने के लिए ।
सम्राट विक्रमादित्य- बेताल हमें उपाय बताओ उसे जीवित करने का ।
बेताल - सम्राट भोगानंद की मृत्यु सामान्य नही थी उसकी मृत्यु प्रकृति ने की थी उसकी अस्थिया लेकर पृथ्वी का मंथन करना पढेगा क्योकि तभी प्रकृति से उसे जीवित किया जाएगा परंतु विक्रम उसमे खतरा बहुत है प्रकृति के खिलाफ जाना पढेगा ।
सम्राट विक्रमादित्य- मित्र तुमने ही कहा था की मुझ में बहुत शक्तियां है बस तुम चिंता मत करो में सब ठीक कर दूंगा ।
सम्राट विक्रमादित्य फिर उसी जगह जाते है जहां भोगानंद रहता था वहां उन्हें भोगानंद की अस्थिया मिलती है सम्राट विक्रमादित्य कहते है अब हम करेंगे पृथ्वी यज्ञ ।
सम्राट विक्रमादित्य यज्ञ करते है और भौगानंद की आत्मा सम्राट से कहती है कैसे याद किया मुझे ।
सम्राट विक्रमादित्य उसे अपनी बातो में बांधते है ।
सम्राट विक्रमादित्य- हम आपके शिष्य है आपको जीवित करने आए है ।
भोगानंद - हम जीवित होना चाहते है परंतु हमें किसी स्त्री के साथ अनुष्ठान करना है ।
सम्राट विक्रमादित्य उसे कहते है हम बताते है आपको और वे तुरंत महल आते है ।
महल में महारानी चित्रलेखा सम्राट से कहती है सम्राट क्या हुआ ।
सम्राट विक्रमादित्य- महारानी हम बताएंगे आपको अभी हम अपने कक्ष में जाते है ।
महारानी चित्रलेखा भगवान महादेव की आराधना कर रही होती है उसके पश्चात वे सम्राट के पास जाती है ।
महारानी चित्रलेखा - सम्राट आज आप पूजा करने नही आए और कौन सी चिंता है जो आपको सता रही है हम आपकी पत्नी है आपको जानती है बताइए सम्राट ।
सम्राट विक्रमादित्य - भोगानंद ने कहा है कि उसे एक स्त्री चाहिए अनुष्ठान के लिए मगर महारानी हम किसी का सम्मान दाव पर कैसे लगा सकते है हम इतना बड़ा अधर्म नही कर सकते है ।
महारानी चित्रलेखा - सम्राट हम महादेव जी से कह ही रहे थे की आपकी सहायता करने में हमारी मदद करे हम आपके साथ चलेंगे ।
सम्राट विक्रमादित्य- यह क्या कह रही है आप महारानी कभी नही हम ऐसा कभी नही करेंगे ।
सम्राट विक्रमादित्य महारानी चित्रलेखा को मना करते है ।
महारानी चित्रलेखा - सम्राट हमने विवाह में आपको वचन दिया था कि आपके सुख दूख में आपका साथ देंगे आज इस दुख की घड़ी में हम आपका साथ दे रहे है तो क्या गलत कर रहे है।
सम्राट विक्रमादित्य- महारानी हम आपका जीवन संकट में नही डाल सकते है ।
महारानी चित्रलेखा - सम्राट आप नारियों के सम्मान की लडाई लड रहे है और अगर हमें कुछ होता भी है तो एक नारी का जीवन सभी नारियों के सम्मान के लिए काम आएगा ।
सम्राट विक्रमादित्य- नही महारानी ।
महारानी चित्रलेखा - सम्राट आप ज्यादा मत सोचिए आपको हमारी सौगंध ।
सम्राट विक्रमादित्य- आपको पत्नी के रूप में पाकर हम धन्य हो गए महारानी जरूर हमने पिछले जन्म में अच्छे कर्म किये होंगे ।
महारानी - धन्य तो हम है सम्राट आपको पति के रूप में पाकर।
सम्राट विक्रमादित्य रूक जाते है ।
महारानी चित्रलेखा - क्या हुआ सम्राट ।
सम्राट विक्रमादित्य- एक एक कदम आगे बढाने से आपसे दूर होते जा रहे है महारानी ।
तभी बेताल आ जाता है । बेताल - विक्रम यह क्या कर रहा है अपनी पत्नी को दाव पर लगा रहा है उन्होने कसम दी और तुमने मान लिया ।
सम्राट विक्रमादित्य- हम ही जानते है हम पर क्या बीत रही है बेताल अगर तुम्हारे पास और कोई उपाय है तो बताओ ।
बेताल - आओ मेरे साथ कुछ सोचते है मगर महारानी नही जाएगी ।
महारानी चित्रलेखा - लोग जीते जी मित्रता नही निभाते और बेताल मरने के बाद भी मित्रता निभा रहे है ।
सम्राट विक्रमादित्य- बेताल इस समस्या का निवारण तो स्त्री ही है कहा से आएगी स्त्री इस पेड से आएगी ।
बेताल- हां आएगी ।
सम्राट विक्रमादित्य- यह क्या कह रहे हो तुम ।
बेताल- देखो ।
बेताल महारानी चित्रलेखा का रूप धारण करता है । विक्रम जब तुम मुझे पहचान नही सके तो वो क्या पहचानेगा ।
सम्राट विक्रमादित्य- परंतु तुमने महारानी का ही रूप क्यो धारण किया अन्य स्त्री का क्यो नही ।
बेताल - ताकि भोगानंद को शक ना हो और वो प्रश्न ना करे ।
उधर भोगानंद इंतजार करता है अनुष्ठान का समय हो गया विक्रम अब तक क्यो नही आया ।
सम्राट विक्रमादित्य- हम आ गए ।
भोगानंद - कितना समय लग गया तुम्हे आने में ।
सम्राट विक्रमादित्य- हम उस स्त्री को लेकर आए ।
भोगानंद - हमने ऐसी सुंदर स्त्री अपने जीवन में कभी नही देखी । हम इसके साथ अनुष्ठान पूरा करते है उसके बाद हम तुम्हे बुलाएंगे ।
सम्राट विक्रमादित्य- जी ।
उधर बेताल अपने मन में सम्राट विक्रमादित्य को कहता है विक्रम हम जा रहे है अब हमारा सम्मान तुम्हारे हाथ में है तुम जाओ और उन सभी स्त्रियों को अपने साथ लेकर आना ।
सम्राट विक्रमादित्य- तुम चिंता मत करो ।
भोगानंद कहता है स्त्री हम तुम्हारा श्रृंगार करेंगे फिर तुम्हारा भोग करेंगे ।
बेताल मन में कहता है आज मृत्यु तुम्हारा भोग करेगी भोगानंद । विक्रम जल्दी आना कही यह पिशाच सच में अनुष्ठान पूरा ना कर ले ।
उधर सम्राट विक्रमादित्य सभी स्त्रियों का आवाहन करते है ।
देवियों में चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य आप सभी का आवाहन करता हूं ।
स्त्रियां- आप हमें बार बार क्यो परेशान कर रहे है सम्राट ।
सम्राट विक्रमादित्य- हम आपको परेशान नही आपकी सहायता करने आए है ।
स्त्रियां- हमारी सहायता भोगानंद के आने से ही होगी ।
सम्राट विक्रमादित्य- हम उसे लेकर आए है देवी आप देख लिजिए वो अनुष्ठान कर रहा है ।
स्त्रियां- हां बहनों यह सही कह रहे है आओ हम सब का इतंजार समाप्त हुआ अब हम लेंगे उस से बदला ।
उधर भोगानंद का अनुष्ठान चल रहा होता है तभी उसका अनुष्ठान बीच में रूक जाता है ।
भोगानंद - किसने किया यह दुस्साहस ।
स्त्रियां- हमने किया है ।
भोगानंद - अच्छा हुआ तुम सब आ गई अब में तुम सब की शक्तियां धारण करूंगा ।
उधर महल में महारानी चित्रलेखा भगवान शिव की आराधना करती है हे महादेव आज शिवरात्री है हमारे पति को विजय करे।
उधर बेताल अपने असली रूप में आ जाता है और कहता है भोगानंद अब तुम इन स्त्रियों की शक्ति धारण नही कर पाओगे क्योकि यहां एक भी जीवित स्त्री नही बची है ।
स्त्रियां- भोगानंद तुझे बहुत शोक था ना हमारी शक्तियां धारण करने का ले कर ।
सभी स्त्रियां भोगानंद को मार देती है सभी स्त्रियां हाथ जोड़कर सम्राट विक्रमादित्य के सामने खडी हो जाती है ।
स्त्रियां- सम्राट हमें क्षमा कर दिजिए सबसे पहले तो हम आपको पहचान ना सके सम्राट । सम्राट आप जैसा पुरूष संसार में कोई नही आप महान है सम्राट आपके पावर चरणों में हमारा प्रणाम है ।
सम्राट विक्रमादित्य- देवियों यह तो हमारा कर्तव्य था ।
स्त्रियां- सम्राट अभी हमारा कार्य अधूरा है आपने जिस प्रकार हमारा प्रतिशोध लेने में हमारी मदद की वैसे ही आप हमें इस योनी से मुक्ति दिजिए ।
सम्राट विक्रमादित्य- आप हमें बताए हम करेंगे ।
स्त्रियां- सम्राट हमारा पिंड दान कर दिजिए हमें मुक्ति मिल जाएगी ।
सम्राट विक्रमादित्य- जरूर ।
सम्राट विक्रमादित्य- मित्र बेताल आज तुम नही होते तो हम यह नही कर पाते तुम्हारा धन्यवाद मित्र ।
बेताल - अरे सम्राट यह तो मेरे लिए बढी बात है कि में आपके काम आ सका ।
सम्राट विक्रमादित्य और महारानी चित्रलेखा दोनों पिंड दान करते है उन स्त्रियों का जिससे उन स्त्रियों को मुक्ति मिल जाती है ।
स्त्रियां- सम्राट विक्रमादित्य आप महान है नारि सम्मान में आपका यह सम्मान संसार में सर्वश्रेष्ठ है सम्राट आप महापुरूष है आदर्श है और देवी आप भी बहुत महान है हम आपके भाग्य की कामना करते है कि हर महिला का भाग्य आप जैसा हो ।
महारानी चित्रलेखा - धन्यवाद देवीयों ।
सम्राट विक्रमादित्य- मेरे लिए स्त्री सम्मान का प्रतिक है वे देवी है , बेटी है अर्धनग्नी है मां है उनका सम्मान सदैव होगा हमारे शासन में ।
स्त्रियां- सम्राट विक्रमादित्य आपकी महानता इसी तरह विश्व में सर्वश्रेष्ठ रहेगी । सम्राट विक्रमादित्य की जय सम्राट विक्रमादित्य की जय । कहकर देवियां विदा लेती है ।
सम्राट विक्रमादित्य- महारानी हमें बेताल को धन्यवाद देने जाना चाहिए ।
महारानी चित्रलेखा - जरूर सम्राट ।
सम्राट विक्रमादित्य- मित्र बेताल बाहर आओ हम आए है और एक शुभ समाचार लाए है ।
बेताल- बोलो सम्राट ।
सम्राट विक्रमादित्य- मित्र बेताल हम आपका धन्यवाद देने आए है ।
बेताल - अरे वो तो मुझे पता है शुभ संदेश क्या है ।
सम्राट विक्रमादित्य- महारानी ने तुम्हे भोजन पर बुलाया है ।
बेताल- में आऊंगा जरूर ।
सम्राट विक्रमादित्य- चलते है मित्र ।
।। कथा कहते हुए देवी कहती है तो राजन् ऐसे थे हमारे चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य जिन्होने 100 सालों से भटकती हुए महिलाओं को मुक्ति दिलाई और मृत भोगानंद को जीवित कर उसे दंड दिया , आज जहां समाज में हर और महिला का अपमान हो रहा है वहीं सम्राट विक्रमादित्य ने मृत महिलाओं के सम्मान की रक्षा की । राजा भोज- हां देवी चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य को मेरा नमन वे वास्तव में सर्वश्रेष्ठ थे ।
जय चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य
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